वीरेन्द्र गोयल, सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार विजेता स्मृतिशेष कवि केदारनाथ अग्रवाल की कर्मभूमि बांदा से जो रेत कवि की हथेली में थीबांदा जिले का कोई […]
Read moreDay: September 7, 2026
बुंदेलखंड में रेत खननः पहाड़ खा गए वो ‘पेट’ और जो नदी खा गई वो ‘मां’
मुकुंद/अभिमन्यु, चित्रकूट आपदा अध्ययन केंद्र से कभी यहां श्मशान था…। अब उसमें मुर्दे नहीं जलते। रेत की बोरियां रखी होती हैं। जिस जमीन पर मनुष्य […]
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