About us

वॉटर वॉच वर्ल्ड (waterwatchworld.com) पूरी तरह गैर व्यावसायिक और सिर्फ पानी पर केंद्रित भारत से संचालित पहला समाचार पोर्टल है। और इसकी शुरुआत भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट में ‘मार दी गई’ पयस्वनी नदी और सरयू नदी को पुनः उसी स्वरूप में अवतरित करने के लक्ष्य के साथ की जा रही है, जिसका जिक्र पुराणों और अन्य प्राचीनतम भारतीय ग्रंथों में है। यह पोर्टल देश-दुनिया के पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन पर भी चर्चा करेगा। वह इसलिए कि इन सबका संबंध कहीं ना कहीं पानी से है। पानी की व्याख्या करना बहुत मुश्किल है। जल-जंगल-जमीन सब पानी में निहित है।

waterwatchworld देश ही नहीं, दुनिया के किसी भी हिस्से के मारे जा रहे जलस्रोतों पर नजर रखने की कोशिश करेगा। वॉटर वॉच वर्ल्ड ऐसी सामग्री को सपाट और बिना लाग-लपेट के प्रस्तुत कर वर्तमान पत्रकारिता में भगीरथ प्रयासों के लिए आम लोगों का आह्वान भी करता है। भारतीय परंपरा में पहले से उपस्थित जल मूल्यों को स्थापित करना हमारा सीधा लक्ष्य है। हमारी कोशिश होगी कि लघु और मध्यम समाचार पत्र- पत्रिकाओं, डिजिटल माध्यम (सोशल मीडिया) को हम वस्तुस्थिति से अवगत कराएं। सरकारों को भी बताएं कि जल माताओं (नदियों) के दुश्मन कौन हैं। हमारा मकसद चित्रकूट की कंदराओं, घने जंगलों में तपस्यारत पानी के पहरेदार ऋषि, मुनि, संत और महात्माओं की आवाज को सरकार तक सीधे पहुंचाना भी है।

हम अपनी प्रतिबद्धता के साथ कामदगिरि के ब्रह्मकुंड तक पहुंच चुके हैं। यह पयस्वनी का उद्गम है। ब्रह्मकुंड के आसपास कहीं पयस्वनी नहीं है। ब्रह्मकुंड भी सूख रहा है। यह वही पयस्वनी है जो कोई 40-50 साल पहले रामघाट में मंदाकनी को खुद में समेट कर बहन सरयू से मिलते हुए गोस्वामी तुलसीदास के राजापुर में जाकर यमुना में विलीन होते समय प्रयाग को ताकती रही हैं। आप सब हमारे सहयोगी हैं। आप चाहते हैं कि जंगल-जमीन-जन-जानवर से यह संसार आबाद रहे तो पानी (नदी, तालाब, कुआं, बावली) को बचाना होगा। यह सदानीरा रहे हैं। हमारा मानना है कि आप सब कुछ बना सकते हैं, मगर पानी नहीं। यह ध्यान रखना होगा। दुनिया के कई देश जल के लिए ‘जल’ रहे हैं। पिछले दिनों बांदा के तापमान ने आसमान छू लिया है। केन नदी की कोख छलनी हो चुकी है। अंधाधुंध विस्तार ने वृक्षों को लील लिया है। अगर यह सिलसिला नहीं थमा तो, आने वाले सालों में देश का कोई दूसरा शहर भी बांदा बनेगा। मंदाकिनी नदी की बाढ़ ने लोगों को झकझोर दिया है। वॉटर वॉच वर्ल्ड सपनों का सौदागर नहीं है। पूरी कोशिश होगी, तथ्यों का अन्वेषण हो। बिना राग-द्वेष के सत्य को सामने रखा जाए। पानी की आस की यह लौ जलती रहे। उम्मीद है देश में मारी जा रही नदियों को बचाने के लिए कोई ना कोई राम जरूर बनेगा।