मुकुंद/अभिमन्यु, चित्रकूट आपदा अध्ययन केंद्र इस बार चित्रकूट में पहली नजर टाठी घाट की निर्मल मंदाकिनी पर पड़ी। यह वही नदी है, जिसे महर्षि वाल्मीकि […]
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जल से जलता चित्रकूट… जहां अकाल ने कभी खेत झुलसाए, अब पानी ने जला दिया
मुकुंद/अभिमन्यु, चित्रकूट आपदा अध्ययन केंद्र चित्रकूट के किसान रामचरण ने जून में गहने गिरवी रखकर अरहर बोई। सितंबर में उसी खेत को पानी ने जला […]
Read moreनदी उत्सव… वही सवाल — आखिर यमुना साफ क्यों नही होती
मुकुंद/अभिमन्यु, चित्रकूट आपदा अध्ययन केंद्र इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) नई दिल्ली का सातवां नदी उत्सव (24–26 सितंबर) का समापन हो गया। ‘शाश्वत यमुना’ […]
Read moreकेन-बेतवा लिंक परियोजना… और भोर से पहले ‘जो’ हुआ
मुकुंद/अभिमन्यु, चित्रकूट आपदा अध्ययन केंद्र बुंदेलखंड की प्यास को महसूस करने के लिए केन-बेतवा लिंक परियोजना का पूरा समीकरण समझना होगा। देश में नदी जोड़ो […]
Read moreChitrakoot anant Chitrakoot katha anantaah. Vo doodh ki dhaara, aaj jo naala ban gayi
Mukund / Abhimanyu Bhai / Heera Singh, Chitrakoot Aapda Adhyayan Kendra Tulsidas wrote in the Ramcharitmanas: “Hari Ananta Hari Katha Ananta.” If he were alive […]
Read more‘केदार की’ कविताओं में ‘केन’ और बांदा के ‘उत्खनन का ‘आज’
वीरेन्द्र गोयल, सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार विजेता स्मृतिशेष कवि केदारनाथ अग्रवाल की कर्मभूमि बांदा से जो रेत कवि की हथेली में थीबांदा जिले का कोई […]
Read moreबुंदेलखंड में रेत खननः पहाड़ खा गए वो ‘पेट’ और जो नदी खा गई वो ‘मां’
मुकुंद/अभिमन्यु, चित्रकूट आपदा अध्ययन केंद्र से कभी यहां श्मशान था…। अब उसमें मुर्दे नहीं जलते। रेत की बोरियां रखी होती हैं। जिस जमीन पर मनुष्य […]
Read moreगंगा… सीने में जहर और आस्था के कंधे
मुकुंद, चित्रकूट आपदा अध्ययन केंद्र यह एक अभिशप्त नदी ‘ पवित्र मां’ गंगा की कथा है। वही मां— जो करोड़ों लोगों की आस्था के कंधों […]
Read more“हर ‘जल नीति’ में पानी, हर हश्र में सूखा”
मुकुंद/अभिमन्यु, चित्रकूट आपदा अध्ययन केंद्र यह केंद्र की जल नीतियों, उनकी सिफारिशों और उनके कागजी हश्र की शोक पुस्तिका है। 1987 से 2026 — चार […]
Read moreरसिनः कहां गए ‘अस्सी कुआं, चौरासी ताला’
मुकुंद, चित्रकूट आपदा अध्ययन केंद्र एक गांव, जो कभी अपने बच्चों को प्यासा नहीं रखता था और आज पानी की एक बूंद के लिए तरसता […]
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