Our Team

मुकुंद

संपादक

मुकुंद , सक्रिय पत्रकारिता में लगभग साढे चार दशक से

वॉटर वॉच वर्ल्ड का ताना-बाना बुनने वाले मुकुंद तमाम अवरोधों के बीच विशुद्ध पानी पर पत्रकारिता की राह पर चलने का संकल्प ले चुके हैं। बांदा के वीरेन्द्र गोयल उनके सहयात्री हैं। बांदा, झांसी, जबलपुर, दुर्ग, दिल्ली और चंडीगढ़ के प्रमुख अखबारों में काम कर चुके मुकुंद का पिछले छह माह से कटनी (मध्य प्रदेश) और चित्रकूट (उत्तर प्रदेश) आना-जाना हो रहा है। अभिमन्यु भाई ने बेड़ी पुलिया स्थित अपने सर्वोदय सेवा आश्रम में रहने के लिए स्थान देकर प्रकृति के पास आने का मौका दिया। पानी पर अभिमन्यु का काम देख इस दिशा में पहला कदम रखा है। रही बात वीरेन्द्र गोयल की, वो काफी समय व्यापार में सक्रिय हैं। बांदा में सबसे बड़ा फर्नीचर कारोबार उनका ही है। उनके दोनों बेटे उसे संभाल रहे हैं। वीरेन्द्र सामाजिक और साहित्यिक आयोजनों में हिस्सा लेते रहते हैं पर पत्रकारिता की कसक उनमें अभी भी जिंदा है। वॉटर वॉच वर्ल्ड उनकी इस भूख को शांत करेगा। ऐसा भरोसा है। आमीन…………..। मिलेंगे इसी मुकाम पर

मोहनबाबू अग्रवाल

संरक्षक और कानूनी सलाहकार

मोहनबाबू अग्रवाल (23 अगस्त 1956,आगरा, उत्तर प्रदेश, भारत)

मोहन बाबू अग्रवाल देश के धाकड़ और सम्मानित वकील हैं। कई दशक से भारत के उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) में प्रैक्टिस कर रहे हैं। उनके साथ बेहतरीन वकीलों की टीम है। वह मोहन लॉ कंपनी के कर्ता-धर्ता हैं। उनका आफिस निजामुद्दीन ईस्ट, नई दिल्ली से संचालित होता है। निजामुद्दीन ईस्ट कभी बीबीसी और सर मार्क टुली के नाम से देश में जाना जाता रहा है।

आगरा में पढ़े-लिखे मोहन बाबू अग्रवाल ने 25 से ज्यादा वर्ष तक उत्तर प्रदेश राज्य सरकार का सीनियर वकील के तौर पर प्रतिनिधित्व किया है। 15 वर्ष से अधिक समय तक भारत सरकार (यूनियन ऑफ इंडिया) का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। कमर्शियल और कंज्यूमर मामलों के लिए कई इंश्योरेंस और बैंकिंग कॉर्पोरेट से जुड़े रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित रहीं कई पीआईएल में उनकी प्रमुख भूमिका रही है। हरिजन (दलितों) की समस्याओं पर दो शोध पत्र आगरा यूनिवर्सिटी के रिसर्च जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं।

मोहन बाबू देश के प्रमुख क्लबों के साथ “द इंस्टीट्यूट ऑफ कॉन्स्टिट्यूशनल एंड पार्लियामेंट्री स्टडीज” के आजीवन सदस्य हैं। सुप्रीम कोर्ट यंग लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके हैं कानूनी सलाह के लिए राज्यसभा, लोकसभा और अन्य राष्ट्रीय समाचार चैनलों के नियमित पैनलिस्ट में शामिल हैं। वह प्रतिष्ठित अंलकरण डॉ. आम्बेडकर राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए नामांकित हो चुके हैं।

अभिमन्यु सिंह

संचालक

अभिमन्यु सिंह (12 मार्च 1963, परसौली (बांदा) उत्तर प्रदेश (भारत), निवास कर्वी, कार्यस्थल चित्रकूट

अभिमन्यु सिंह को अब लोग अभिमन्यु भाई के नाम से अधिक जानते हैं। इनके पिता स्मृति शेष श्री अर्जुन सिंह बांदा जिले में विनोबा भावे के भूदान आंदोलन के अगुवा रहे हैं। अब तो इनके (अभिमन्यु) लिए सर्वोदय सेवा आश्रम ही सब कुछ है। यहीं पर गहन चिंतन-मनन के दौरान वॉटर वॉच वर्ल्ड का सपना जन्मा। इसके संचालन का जिम्मा इन्हीं के कंधों पर है। अभिमन्यु सिंह का 2015-2023 तक चाइल्ड लाइन के अंतर्गत बाल अधिकार पर सीधा काम है। इनकी चित्रकूट में गोस्वामी तुलसीदास डिग्री कॉलेज की स्थापना एवं बालिका राजकीय महाविद्यालय को भूमि आवंटित कराने में बड़ी भूमिका रही है। इन्होंने समूचे बुंदेलखंड की पदयात्रा के दौरान विकास के सबसे बड़े बाधक ‘जल-अकाल’ का अध्ययन किया। 1996 में अकाल से सर्वाधिक प्रभावित बरगढ़ क्षेत्र को अपनी ‘प्रयोगशाला’ के रूप में चुना। पानी का कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए समर्पित कर, यहीं से समग्र विकास का मॉडल विकसित किया।
वो 1991 से युगदृष्टा नानाजी देशमुख के अंत्योदय लक्ष्यों को समर्पित होकर दीनदयाल शोध संस्थान के कार्यक्रमों में विशेष सहयोग देते रहे हैं। 2011 में सूखी सिंहसत नदी को पुनर्जीवित कराने में अहम योगदान देने वाले अभमन्यु सिंह तबसे से मंदाकिनी, सरयू और पयस्वनी के लिए ‘नदी शांति मार्च और सत्याग्रह’ के लिए जाने जाते हैं। 15 अगस्त 2024 को पयस्वनी झील से ‘तिरंगा यात्रा’ निकाल ‘गोल तालाब सत्याग्रह’ प्रारंभ किया। प्रशासन ने 2026 में कर्वी के गोल तालाब को सीवर मुक्त कर सुंदरीकरण का आश्वासन दिया है।

हीरा सिंह

हरफनमौला

हीरा सिंह (15 अक्टूबर 1965) कर्वी, जिला चित्रकूट, उत्तर प्रदेश, भारत)

हीरा सिंह लंबे समय तक न्यायिक सेवा से जुड़े रहे हैं। पिछले बरस सेवानिवृत्त हुए हैं। सर्वगुण संपन्न हैं। चौंकिएगा मत, वह आपको एक ही समय पर कई तरह की भूमिका में नजर आ सकते हैं। ऐसी नेमत ईश्वर हर किसी को नहीं सौंपता। दयालु हैं। वह सब कुछ करने पर विश्वास रखते हैं। हरफनमौला हैं। कभी नदियों किनारे तो कभी घने जंगलों में तपस्यारत संन्यासियों से संवाद करते देखे जा सकते हैं। वॉटर वॉच वर्ल्ड का ताना-बाना बुनने में सिंह का कठिनतम योगदान है। वह सचमुच पानी पर केंद्रित इस पोर्टल के शुभचिंतकों में हैं।

वैद्य केपी तिवारी

संतजन

वैद्य केपी तिवारी

आप देश में नसों के अद्भुत जानकार हैं। चुटकियों में नसें चटकटाकर मनुष्य को कुछ ही समय में चलने-फिरने लायक बना देते हैं। वॉटर वॉच डॉट वर्ल्ड के दो साथी तो इसके साक्षात प्रमाण हैं। तिवारी जी पुनौरा (पन्ना) मध्य प्रदेश के बजरंगी बली के सेवक हैं। वह हमारे आग्रह पर अपने प्रभु के प्रभु भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट में पंद्रह दिन में एक दिन का समय देने के लिए तैयार हो चुके हैं। वह शनिवार को कटनी (मध्य प्रदेश) में नसों और जोड़ों की बीमारी की दवा देते हैं।

स्वामी धर्मानन्द

संतजन

स्वामी धर्मानन्द

आप कानपुर के रहने वाले हैं। ब्राह्मण हैं। उच्च कुलीन परिवार से हैं। बचपन से वैराग्य उत्पन्न हो जाने से घरवार छोड़कर सत्य की तलाश में हिमालय की कंदराओं से भटकते हुए आखिरी में पयस्वनी के उद्गम ब्रह्मकुंड को ठिकाना बनाया। इस समय देवल कुटी में अकेले रहते हैं। चित्रकूट से यहां की दूरी करीब 50 किलोमीटर है। कुटी के नीचे मंदाकनी नदी बहती हैं। यहीं वह एकांत में तपस्या करते हैं। योग और जड़ी-बूटियों के विशेषज्ञ हैं। रविवार और बुधवार को हर तरह के पीड़ित के कमर में धागा बांधते हैं।

गोपाल गोयल

गोपाल गोयल
आप बुंदेलखंड (बांदा) के प्रतिष्ठित साहित्यकार और पत्रकार हैं। कवि केदारनाथ अग्रवाल के समग्र साहित्य के अध्येता और मुक्ति चक्र के संपादक हैं। वॉटर वॉच वर्ल्ड के साथ पूरी तन्मयता से प्रतिबद्ध हैं। गोपाल गोयल ‘ मुक्ति चक्र कवि केदार सम्मान’ के संस्थापक हैं।

वीरेन्द्र गोयल

वीरेन्द्र गोयल (26 अप्रैल, 1967)

वीरेंद्र पूर्व पत्रकार हैं। उत्तर प्रदेश के बांदा जिला मुख्यालय से कई दशक तक दिल्ली और लखनऊ के तमाम अखबारों के नगमा निगार रहे। अच्छे कवि और शानदार श्रोता हैं। संप्रति-बांदा में कारोबार। वॉटर वॉच वर्ल्ड के सहयोगी।

आलोक द्विवेदी

आलोक द्विवेदी
आप बुंदेलखंड के चित्रकूट जिले के कर्वी के लब्ध प्रतिष्ठ वकील और समाजसेवी हैं। पत्रकार भी रहे हैं। फिलहाल पुरुषार्थ कर्म और अध्ययन में व्यस्त रहते हैं। आपका वॉटर वॉच वर्ल्ड को सम्पूर्ण समर्थन हासिल है। राजनीति आपका लंबा शगल रहा है।

लक्ष्मी नारायण गुप्ता

लक्ष्मी नारायण गुप्ता
आपका बांदा में दवाओं का थोक कारोबार है। आपकी सामाजिक संचेतना के सभी कायल हैं। आपकी अपनी विशिष्ठ पार्टी से राजनीतिक प्रतिबद्धता है। लक्ष्मी नारायण गुप्ता वॉटर वॉच वर्ल्ड के लिए हर तरह से समर्पित योद्धा हैं। वह हाल ही में पारिवारिक आघात से उबरे हैं।

दिलीप गुप्ता

दिलीप गुप्ता
बांदा शहर में पत्रकारिता का सुपरिचित चेहरा। बेहद मिलनसार और यारों के यार हैं। दिलीप नव कर्मयुग प्रकाशन (दैनिक समाचार पत्र) का संचालन करते हैं। उन्होंने वॉटर वॉच वर्ल्ड को संपूर्ण शक्ति से समर्थन का वादा किया है। युवा साथी हैं। उम्मीदों के पर लग गए हैं।

ब्रजेश कुमार गुप्ता (पप्पू)

ब्रजेश कुमार गुप्ता (पप्पू)
पप्पू अतर्रा (बांदा) के युवा किसान हैं। सामाजिक और धार्मिक कार्यों के अलावा देशाटन में रुचि रखते हैं। वॉटर वॉच वर्ल्ड के जल भिक्षु आह्वान पर बिना कुछ सोचे-विचारे अर्थ प्रदान करने वाले प्रथम शुभचिंतक हैं। इस नाते पप्पू हमारे प्रथम पुरुष हैं।

शैलेन्द्र प्रताप सिंह (बबलू)

शैलेन्द्र प्रताप सिंह (बबलू)
बबलू हमारे पुराने परिचित हैं। इनके पिता पुलिस विभाग में वरिष्ठ पद पर रहे। मगर ये किसान हैं। कानपुर देहात में रहते हैं। नेक इनसान और यारबाजी के लिए मशहूर हैं। इनदिनों कई तरह की बीमारियों से जकड़े हैं। वॉटर वॉच वर्ल्ड के जल भिक्षु आह्वान पर बबलू का योगदान भुला पाना असंभव है।

मितुल दीक्षित

मार्गदर्शक

मितुल दीक्षित

मितुल दीक्षित चंडीगढ़ (ट्राई सिटी) के ख्यातिलब्ध शिक्षाविद् हैं। वो दीक्षांत ग्रुप ऑफ स्कूल्स के चेयरमैन हैं। वो वॉटर वॉच वर्ल्ड के मार्गदर्शक हैं।

मितुल भारतीय प्रबंधन संस्थान, कोलकाता और सिंधिया स्कूल ग्वालियर के पूर्व छात्र हैं। इसके साथ ही उन्होंने हार्वर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ एजुकेशन से भी शिक्षा प्राप्त की है। [

वो शिक्षा के क्षेत्र में लगभग ढाई दशक से सक्रिय हैं। उन्हें स्कूलों में आधुनिक तकनीक (जैसे प्रत्येक विद्यार्थी के लिए लैपटॉप व स्मार्ट क्लासरूम) और ‘थिंकिंग स्कूल’ कॉन्सेप्ट को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है।

वह ट्राइसिटी में बच्चों के लिए चंडीगढ़ चिल्ड्रन्स लिटरेचर फेस्टिवल जैसी साहित्यिक गतिविधियों के आयोजन में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

दीक्षांत स्कूल की स्थापना साल 2002 में प्रसिद्ध शिक्षाविद ओएन दीक्षित के विजन के साथ हुई थी। इस स्कूल में बच्चों के लिए देश का पहला ऑन-कैंपस तारामंडल स्थापित किया गया है।

हाल ही में स्कूल में युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर की कोचिंग देने के लिए रोहित शर्मा की मेंटरशिप वाली ‘क्रिककिंगडम क्रिकेट एकेडमी’की भी शुरुआत की गई है।

गणेश गुप्ता

उम्मीद की किरण

गणेश गुप्ता

गणेश गुप्ता वॉट वॉच वर्ल्ड के लिए उम्मीद की किरण जैसे हैं। उन्होंने अब तक भरपूर मदद की है। वह नई दिल्ली टाइम्स दिल्ली के एक दशक तक संवाददाता रहे हैं। जिनेवा और मॉस्को की कई यात्राएं उनके हिस्से में हैं। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड के बांदा निवासी गणेश गुप्ता से नब्बे के दशक से जुड़ाव है। वह आज भी बना हुआ है।

वो स्मृतिशेष डॉ. गोविंद नारायण श्रीवास्तव (1950-1999) के ‘इंस्टीट्यूट ऑफ नॉन अलाइन्ड स्टडीज’ (गुटनिरपेक्ष अध्ययन संस्थान) के साथ लंबे समय तक संबद्ध रहे हैं। गणेश गुप्ता आज सफल उद्यमी हैं। वो दिल्ली रहते हैं।

राजीव त्यागी

हमदम

राजीव त्यागी

राजीव त्यागी वॉटर वॉच वर्ल्ड के प्रमुख सहयोगी हैं। राजीव मूलतः फोटो पत्रकार हैं। नब्बे के दशक से मुकुंद के करीबी मित्रों में शुमार हैं। दिल्ली में सर्वाधिक आर्थिक मदद इस भाई ने की।

दिल्ली के अखबार उद्योग में राजीव 30 वर्षों से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। मिड-डे और अमर उजाला उनके प्रमुख ठिकाने रहे।

विक्रम उपाध्याय

नींव के पत्थर

विक्रम उपाध्याय

विक्रम उपाध्याय वॉटर वॉच वर्ल्ड के बड़े सहयोगी हैं। विक्रम नब्बे के दशक से परिचित हैं। विक्रम उपाध्याय को हिंदी पत्रकारिता में 25 वर्षों का अनुभव है। अनेक प्रमुख समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं में कार्य करने के बाद स्वतंत्र लेखन में व्यस्त। आर्थिक एवं विदेश मामलों पर अध्ययन एवं शोध कार्य के लिए सीनियर रिसर्च फेलोशिप।

विक्रम के बारे में यह जानना ही काफी है कि अगर आप भूखे हैं और उसके पास एक रोटी है तो वह उसका बड़ा हिस्सा आपको खिलाकर खुश हो जाते हैं। शानदार व्यक्तित्व के धनी हैं। देश के पत्रकारों में लोकप्रिय हैं। उन्हें राष्ट्रीय राजधानी हाउसिंग प्रोजेक्ट के अग्रणी योजनाकारों में गिना जाता है।

उमाशंकर पाण्डेय

चरैवेति… चरैवेति…

उमाशंकर पाण्डेय

उमाशंकर पाण्डेय (जन्म: 5 फरवरी 1971)

उमाशंकर पाण्डेय देश के ख्तात सामाजिक कार्यकर्ता और ‘जल योद्धा’ हैं। उन्हें उत्तर प्रदेश के सूखाग्रस्त बुंदेलखंड क्षेत्र में परंपरागत भू-जल संरक्षण के लिए जाना जाता है। उनके भगीरथ प्रयासों के लिए केंद्र सरकार ने उन्हें वर्ष 2023 में ‘पद्म श्री’ से अलंकृत किया।

उमाशंकर पाण्डेय ने अपने गांव जखनी (बांदा) में ‘खेत पर मेड़ और मेड़ पर पेड़’ अभियान की शुरुआत 2005 में की।

पाण्डेय के प्रयासों से जखनी देश का पहला ‘जल ग्राम’ बना। उमाशंकर ने दिव्यांग होते हुए भी हार नहीं मानी। उन्होंने ग्रामीणों को एकजुट किया और बिना किसी सरकारी वित्तीय मदद के सामुदायिक सहभागिता से पूरे गांव में मेड़बंदी करवाई। उनके इस प्रयास से जखनी गांव पानी के संकट से उबरकर एक आत्मनिर्भर ‘जल ग्राम’ बन गया। उनके मॉडल को आज देश-विदेश में सराहा और अपनाया जा रहा है।

पाण्डेय वॉटर वॉच वर्ल्ड के संपादक मुकुंद के अभिन्न साथी हैं। वह चलते रहने पर विश्वास करते हैं। चरैवेति… चरैवेति…यह धुन उन्हें अग्रिम पंक्ति में रखती है।